Home newsसांतवे वेतन आयोग के नए नियम ।। नए नियम किये सरकार ने लागू

सांतवे वेतन आयोग के नए नियम ।। नए नियम किये सरकार ने लागू

सांतवे वेतन आयोग के नए नियम ।। नए नियम किये सरकार ने लागू

सातवाँ वेतन आयोग: पदोन्नति और वेतनवृद्धि के लिए लाया गया एमएसीपी सातंवे वेतन आयोग ने प्रोमोशन और वेतन वृद्धि का पैमाना बदल दिया।

नई दिल्ली : सातंवे वेतन आयोग की सिफारिश लागू होने के साथ ही कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत के तौर पर एमएसीपी को नरेंद्र मोदी सरकार द्वरा स्वीकारना बना था।

इससे खाश तौर पर तृतिया और चर्तुथ श्रेणी के कर्मचारियों की नाराजगी खुलकर सामने आई थी ।

आखिर कर्मचारि इससे नाराज क्यो हुए क्या है ये एमएसीपी। (MACP – MODIFIED ASSURED CAREER PROGRESSION) इसके तहत ऐसे कर्मचारियों का वार्षिक अप्रेजल या इंक्रीमेंट नही होगा ।

वित्तमंत्रालय ने सातवें वेतन आयोग की सीफारिश के क्रियान्वयन सबंधी अधिसूचना जारी करते हुए कहा था कि अब कर्मचारियों के प्रोमोशन और वार्षिक इंक्रीमेंट के संबधित वेंचमार्क का नया स्तर अब अच्छा से बहुत अच्छा कर दिया था ।

बताया जा रहा है कि इस संबंध में सीएजी (CAG) ने कोई सर्कुलर जारी किया है । अभी इसकी पुष्टि नही हो पाई है।

उल्लेखनीय है कि सातवें वेतन आयोग की सिफरिश को लागू करते हुए मंत्रालय ने यह भी कहा था कि पहले की तरह 10 साल , 20 साल और 30 साल की सेवा से सबंधित (MACP – MODIFIED ASSURED CAREER PROGRESSION) एमएसीपी स्किम को जारी रखा जाएगा ।

जिन कर्मचारियों का प्रदर्सन एमएसीपी के लिए निर्धारित बेंचमार्क या पहले 20 सालो की सेवा के दौरान नियमित प्रोमोशन के लिए आपेक्षित नही पाया जाएगा । तो ऐसे कर्मचारियों की वर्षिक इंक्रीमेंट को रोक देने संबंधित शिफरीश को स्वीकार कर लिया गया था ।

कर्मचारियों की नाराजगी सबसे ज्यादा प्रोमोशन के नए मापदंडों को लेकर रही उनका कहना था कि नए नियमो के लागू होने के बाद किसी भी कर्मचारी को तभी तरक्की मिलेगी । जब उसका काम ‘वेरी गूड’ की श्रेणी में आएगा। अब तक ”गुड ” आने से ही तरक्की का रास्ता खुल जाता है।

आयोग ने ये भी कहा था कि , इस आयोग का मानना है कि कामकाज के मापदंड को पूरा नही करने वाले कर्मचारियों को भविष्य में सालाना बढ़ोतरी नही मिलनी चाहिए । वेतन आयोग ने सरकार को सोपि अपनी रिपोर्ट में कहा था

”यह लापरवाह और अक्षम कर्मचारी” के लिए प्रतिरोधक का काम करेगा । यह जुर्माना नही है ऐसे में अनुशासनात्मक मामलो दंडात्मक कार्यवाई के लिए बने नियम ऐसे मामलो में लागू नही होने । ऐसे कार्य क्षमता बढ़ाने के तौर पर देखा जाएगा । आयोग ने कहा कि ऐसे कर्मचारी स्वेच्छिक सेवानिवृति की तय शर्तो पर ही सेवा से मुक्त हो सकते है।

कर्मचारियों को 10,20 और 30 साल की सेवा में एमएसीपी मिलता है। आयोग ने इस समय- अंतराल को बढ़ाने की मांग ठुकरा दी केंद्र सरकार के तहत करीब 47लाख कर्मचारी काम करते है।

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