Home Nationक्यो मनाया जाता है रक्षाबंधन- kyo manaya jata hai raksha bandhan

क्यो मनाया जाता है रक्षाबंधन- kyo manaya jata hai raksha bandhan

रक्षा बंधन से सम्बंधित कहानी

क्यो मनाया जाता है रक्षाबंधन- kyo manaya jata hai raksha bandhan

बचपन से रक्षा बंधन से संबंधित हमने सबसे अधिक जो कहानी सुनी हज वह रानी कर्णवती व सम्राट हुमायू से संबधित है। यह कहानी उस समय कक दर्शाती है जब मध्यकालीन युग मे राजपूत व मुस्लिम के बीच संघर्ष चल रहा था रानी कर्णवती चितौड के राजा की विधवा थी राजा की अनुपस्थिति में रानी अपने राज्य की रक्षा कैसे करे उन्हें समझ मे नही आ रहा था ।

इसलिए उस दौरान गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से खुद को अपने प्रजा को बचाने के लिए हुमायू से मदद मांगी । उन्होंने हुमायू को एक राखी भेजी और उनसे रक्षा के लिए निवेदन किया रानी की यह रखी पाकर बादशाह ने उन्हें बहन का दर्जा दिया और उनके राज्य की सुरक्षा प्रदान की।

यह वह कहानी है जिसे भारतीय स्कूलो में रक्षा बंधन के समय काफी ज्यादा सुनाया जाता है लेकिन क्या आप जानते है कि इसके अलावा भी हमारे इतिहास में ऐसी कई कहानियां दर्ज है जो रक्षा बंधन त्योहार की महत्ता दर्शाती है।

भगवान विष्णु
सबसे पहले कहानी भगवान विष्णु से संबंधित है, जिसके अनुसार राजा बाली ने जब 110 यज्ञ कर लिए टैब देवताओ का डर बढ़ गया । उन्हें यह भय सताने लगा कि यज्ञ शक्ति से राजा बाली स्वर्ग लोक पर भी कब्जा कर लेंगे इसलिए सभी देव भगवान विष्णु के पास स्वर्ग लोग की रक्षा का फरियाद लेकर पहुचे।
जिसके बाद विष्णुजी ब्राम्हण बेष धारण कर राजा बली के समझ प्रकट हुए और उनसे भिक्षा मांगी । भिक्षा में राजा ने उन्हें तीन पग भूमि देने का वादा किया । लेकिन तभी बलि के गुरु शुक्रदेव ने ब्राम्हण रूप धरण किये हुए विष्णु को पहचान लिया और बलि को इस बारे में सावधान कर दिया किन्तु राजा अपने वचन से न फेरे और तीन पग भूमि दान कर दी।

इस दौरान विष्णु जी ने वामन रूप में एक पुग में स्वर्ग और दूसरे पग में पृथ्वी को नाप लिया। अब बारी थी तीसरे पग की , लेकिन उसे वो कहा रखे ? वामन का तीसरा पग आगे बढ़ता हुआ देख राजा परेशान हो गए ,वे समझ नही पा रहे थे कि अब वो क्या करे और तभी उन्होंने आगे बड़कर अपना सिर वामन देव के चरणों मे रखा और कहा कि तीसरा पग आप यह रख दे ।

इस तरह से राजा से स्वर्ग एवं पृथ्वी में रहने का अधिकार छीन लिया गया और वे रसातल लोक में रहने के लिए विवश हो गए । कहते हौ की जब बलि रसातल में चला गया तब बलि ने अपनी शक्ति के बल से भगवान को रात दिन अपने सामने रहने का वचन ले लिया और भगवान विष्णु को उनका द्वारपाल बनना पड़ा । इस वजह से मा लक्ष्मी, जो कि बिष्णु जी का अर्धागिनी तहज वे परेशान हो गयी।
भगवान कर रसातल निवास से परेशान लक्ष्मी जी ने सोचा कि यदि स्वामी रसातल में द्वारपाल बनकर निवेश करंगे तो बैकुण्ड लोक का क्या होगा ? इस समश्या के समाधान के लिए लक्ष्मी जी ने नारद जी ने एक उपाय सुझाव दिया । लक्ष्मी जी ने राजा बलि के पास जाकर उसे राखी बांधकर अपना भाई बनाया और बिंष्णु जी को अपने साथ ले आयी ।।

  1. उस दिन श्रवण मास की पूर्णिमा थी, उस दिन से ही रक्षा बंधन मनाया जाने लगा। आज भी कई जगह इसी कथा को आधार मानकर रक्षा बंधन मनाया जाता है ।।*आशा करता हु की आपको ये पोस्ट अच्छी लगी होगी*
    धन्यवाद

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