Home spritualismओशो ने स्पष्ट किया परमात्मा का प्रमाण ।। osho parmatma pr ।।
ओशो ने स्पष्ट किया परमात्मा का प्रमाण ।। osho parmatma pr ।।

ओशो ने स्पष्ट किया परमात्मा का प्रमाण ।। osho parmatma pr ।।

भगवान , क्या परमात्मा का अस्तित्व सिद्ध किया जा सकता है ।।

मुल्ला नसीरुद्दीन तैरने सीखना गया था नदी के किनारे ,जो उस्ताद थे सीखाने को वो तो एकदम चौंके .. क्योंकि मुल्ला जैसे ही नदी के तट पर गया..पत्थर पर फिसल गया काई जमी होगी भडाम से गिरा

एक पैर तो पानी मे पड़ गया कपड़े भी भीगे ..एकदम से उठा और घर की तरफ भागा उस्ताद ने कहा बड़े मियां कहा जा रहे हो ?

मुल्ला ने कहा – अब जब तक तैरना ना सिख लू तब तक नदी के पास आऊंगा भी नही ..यह तो खतरनाक धंधा है यह तो उसकी दुआ कहो यह तो उसकी कृपा कहो अगर ज़रा सा ज़ोर से फिसलता तो उस्ताद तुम तो खड़े थे बाहर देखते रहते और हम तो गए थे काम से फिर !

अब तो तभी फ्टकूँगा जब तैरना सीख जाऊंगा

अब तैरना कहा सीखोगे ? कोई गद्दे तकिए बिछाकर तैरना सीखा जाता है और गद्दे तकिए बिछाकर तुम कितना ही हाथ पैर पटक लो लेकिन गद्दे तकिए का अभ्यास पानी में काम ना आएगा ।।

नही , तैरने सीखने के लिए पानी के पास जाना पड़ता है वैसे

परमात्मा का अस्तित्व कैसे सिद्ध करोगे ? तर्क से ? विचार से ? तो , तो तुम उल्टे काम मे लग गए ..अगर परमातमा को लोगो ने जाना है तो निर्विचार से ह्रदय से और तुम सिद्ध करने लगे बुद्धि से ? नही होगा !

फिर आज नही तो कल तुम कहोगे ..है ही नही ! और एक बार ये बात तुम्हारे मन में गहरी बैठ गयी की है ही नही ।। तो बस अटक गए तुम्हारा विकास अवरुद्ध हुआ

गलत प्रश्न न पूछो ! पूछो की क्या मैं हु ? पूछो की कैसे जाने कौन हूं मैं ? छोड़ो परमात्मा को ..क्या लेना देना परमात्मा से ? पहले पानी की बूंद तो पहचान लो सागर को बाद में पहचानना अभी तो बूंद से भी पहचान तुम्हारी नही और सागर के सम्बंध में प्रश्न उठाते हो

ये प्रश्न व्यर्थ है इनके उत्तर दिए नही जा सकते , देंगे तो केवल नासमझ .. हा शास्त्री और किताबे देते है इनेके बड़े बड़े प्रमाण परन्तु सारे प्रमाण बचकाने है कौड़ी भर के है क्योंकि प्रमाण दिया ही नही जा सकता

क्या प्रमाण है उनके ?

प्रमाण इस तरह के है जैसे कुम्हार घड़ा बनाता है,घड़ा तो अपने आप बनेगा नही इसी तरह परमात्मा ने जगत बनाया

फिर तत्क्षण तुम पूछते हो कुम्हार को किसने बनाया ? परमात्मा को किसने बनाया ? यही तो बुद्ध ने महावीर ने पूछा ओर पण्डित नाराज़ हो गए ।। तुम कहो परमातमा को बड़े परमात्मा ने बनाया तो ये फिर अंतहीन सृंखला बन जाएगी इसका अंत कहा होगा ? नही ऐसे प्रमाणों से कुछ सिद्ध नही होता ।। कुछ सिद्ध होता है तो नासमझी और बुद्धिहीनता

बुद्ध परमात्मा का प्रमाण नही देते वह परमात्मा का प्रमान बनते है

भेद समझ लेना प्रमाण का । बुद्ध प्रमाण बनते है परमात्मा का , बुद्ध प्रमाण होते है परमात्मा का ।। मैं तुमसे कहूंगा तुम भी प्रमाण बनो तुम भी प्रमाण बन सकते हो । हर व्यक्ति में बुद्धत्व का दिया है ,, झरनें को बहाने की जरूरत है । चट्टान हटाओ विचारों की ओर फूटने दो बहनें दो भाव का झरना !

जिस दिन तुम्हे पता चल जाएगा जीवन एक रास है महोत्सव है राग और रंग से भरा इंद्रधनुष है एक संगीत है अद्भुत स्वरों से पूर्ण उस दिन परमात्मा का प्रमाण मिल गया हालांकि वह प्रमाण तुम किसी ओर को न दे सकोगे

गूंगे का गुड़ हो जाता है वह अनुभव

मगर धन्य है वो लोग जिन्हें ये अनुभव होता है

आप सभी के अंदर विराजमान परमात्मा को प्रणाम ❤

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